जम्मू और कश्मीर के तेज गेंदबाज औकिब नबी ने क्रिकेट इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है। उन्होंने दुलुप ट्रॉफी में चार गेंदों पर चार विकेट लेकर 47 साल पुराने कपिल देव के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। यह उपलब्धि भारतीय घरेलू क्रिकेट में अपनी तरह की पहली है और इसे Wisden ने भी रिकॉर्ड किया है।
28 वर्षीय औकिब नबी, जो नॉर्थ जोन की टीम का हिस्सा हैं, ने बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ग्राउंड पर शानदार गेंदबाजी करते हुए अपनी टीम को मैच में मजबूती दी। उन्होंने 53वें ओवर की अंतिम तीन गेंदों पर क्रमशः विराट सिंह, मनीषी और मुक़्तर हुसैन को पवेलियन भेजा। इसके बाद अगले ओवर की पहली गेंद पर उन्होंने सूरज सिंधु जैसवाल को आउट कर चार विकेट चार गेंदों में लेने का इतिहास रच दिया।

यह कारनामा भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी गेंदबाज ने दुलुप ट्रॉफी में चार लगातार गेंदों पर चार विकेट लिए हों। इससे पहले यह रिकॉर्ड कपिल देव के नाम था, जो उन्होंने लगभग 47 साल पहले बनाया था। औकिब नबी की इस सफलता ने उन्हें क्रिकेट प्रेमियों के बीच खास पहचान दिलाई है।
औकिब नबी की तेज गति और सटीक लाइन-लेंथ के कारण बल्लेबाज उनके खिलाफ संघर्ष करते नजर आए। उनकी गति ने नॉर्थ जोन की गेंदबाजी आक्रमण को और भी धारदार बना दिया है। इस प्रदर्शन से न केवल उनकी व्यक्तिगत छवि चमकी, बल्कि जम्मू-कश्मीर जैसे क्रिकेट के उभरते हुए क्षेत्र के लिए भी यह गर्व की बात है।
औकिब नबी ने घरेलू क्रिकेट में अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा और अवसर मिले तो कोई भी खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम बना सकता है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में अपनी गेंदबाजी में काफी सुधार किया है और घरेलू टूर्नामेंटों में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है।
इस उपलब्धि से यह भी साफ हो गया है कि भारतीय क्रिकेट की ताकत केवल मुख्यधारा के राज्यों में नहीं बल्कि छोटे और उभरते हुए क्षेत्रों में भी है। जम्मू-कश्मीर से ऐसे खिलाड़ी उभरकर आ रहे हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर सकते हैं और नए रिकॉर्ड बना सकते हैं।
आगे चलकर औकिब नबी की यह उपलब्धि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी। यह दर्शाता है कि समर्पण और कठिन परिश्रम से कोई भी खिलाड़ी क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सकता है। उनकी इस सफलता ने भारतीय घरेलू क्रिकेट के परिदृश्य को नया रूप दिया है।
अंत में, औकिब नबी की यह उपलब्धि न केवल उनके करियर के लिए बल्कि जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में उनका नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा, और आने वाले समय में उनसे और भी बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
