पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राजस्थान में पूर्व विधायक के रूप में पेंशन के लिए आवेदन किया है। वे राजस्थान की किशनगढ़ विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं और जुलाई 2019 तक पूर्व विधायक के तौर पर पेंशन प्राप्त कर रहे थे। हालांकि, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल नियुक्त होने के बाद उनकी यह पेंशन रोक दी गई थी। अब उपराष्ट्रपति पद से हटने के बाद धनखड़ ने राजस्थान विधानसभा सचिवालय में पुनः आवेदन देकर अपनी पूर्व विधायक की पेंशन बहाल कराने की प्रक्रिया शुरू कराई है।

धनखड़ ने 21 जुलाई को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद से उन्होंने पूर्व विधायक के रूप में पेंशन के लिए आवेदन किया है। अधिकारियों ने बताया कि सचिवालय ने इस आवेदन पर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है और उनकी पेंशन उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने की तारीख से प्रभावी मानी जाएगी। इसका मतलब यह है कि उपराष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद से धनखड़ को पूर्व विधायक की पेंशन फिर से मिलने लगेगी।
राजस्थान में पूर्व विधायक की पेंशन की शुरुआत प्रति माह 35,000 रुपये से होती है, जो कार्यकाल और उम्र के अनुसार बढ़ती है। 70 वर्ष से अधिक आयु के पूर्व विधायकों को 20 प्रतिशत की वृद्धि भी मिलती है। धनखड़ की उम्र 74 वर्ष है, इसलिए वे इस अतिरिक्त लाभ के भी पात्र हैं। इसके अनुसार, उन्हें अब लगभग 42,000 रुपये प्रति माह की पेंशन मिलेगी। यह राशि राजस्थान सरकार की निर्धारित पेंशन नीति के अनुसार तय की जाती है।
धनखड़ तीन विभिन्न पेंशन के भी हकदार हैं। वे पूर्व उपराष्ट्रपति, पूर्व सांसद और राजस्थान विधानसभा के पूर्व सदस्य होने के नाते तीनों पदों के लिए पेंशन प्राप्त करने के पात्र हैं। प्रत्येक पेंशन की राशि और नियम अलग-अलग होते हैं, लेकिन सभी पेंशन धनखड़ को मिलती हैं। इस बात से उनकी आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो जाती है और वे अपने राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान किए गए योगदान का सम्मान पाते हैं।
धनखड़ के लिए यह पेंशन न केवल आर्थिक मदद का स्रोत है, बल्कि उनके राजनीतिक जीवन की उपलब्धियों का भी प्रमाण है। पूर्व उपराष्ट्रपति के रूप में उनके पद ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया, जबकि राजस्थान में विधायक और सांसद के रूप में उन्होंने स्थानीय और राज्य स्तर पर सेवा की। अब जब वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रह चुके हैं, तो उनकी पेंशन तीन स्तरों पर मिलने का प्रावधान है।
राजस्थान विधानसभा सचिवालय ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और धनखड़ के आवेदन पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने की बात कही है। अधिकारी यह भी स्पष्ट कर चुके हैं कि पेंशन की प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएगी और नियमों के अनुसार ही धनखड़ को पेंशन मिलेगी।
इस फैसले से पूर्व विधायकों और अन्य पदाधिकारियों को यह संदेश भी मिलता है कि उनके पदावसान के बाद भी उनकी सेवा और योगदान का सम्मान सरकार द्वारा किया जाएगा। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि वे उचित आर्थिक सहायता प्राप्त करें।
अंत में यह कहा जा सकता है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का यह कदम पूर्व विधायक की पेंशन पुनः प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है। इससे न केवल उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उनके राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यकाल का भी सम्मान कायम रहेगा। तीन पेंशन का हकदार होने के कारण धनखड़ एक ऐसे नेता के रूप में उभरते हैं जिनका जीवनकाल विभिन्न पदों पर सार्वजनिक सेवा में बीता है और अब उन्हें उनकी सेवाओं का उचित फल मिल रहा है।
