आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 में भारतीय टीम को ‘अपना घरेलू मैदान’ मिलने का बड़ा फायदा मिल रहा है। भले ही पाकिस्तान इस टूर्नामेंट का आधिकारिक मेजबान हो, लेकिन टीम इंडिया के सभी मैच दुबई में खेले जा रहे हैं। वहीं, अन्य टीमों के मुकाबले पांच अलग-अलग स्थानों पर आयोजित किए जा रहे हैं। इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर माइकल एथरटन और नासिर हुसैन का मानना है कि भारत को इस टूर्नामेंट में एक बड़ा और ‘अवश्यंभावी लाभ’ मिल रहा है।

दुबई में खेलने का भारत को बड़ा फायदा

पूर्व इंग्लिश कप्तान माइकल एथरटन ने स्काई स्पोर्ट्स पॉडकास्ट में कहा, “भारत केवल एक ही स्थान पर खेल रहा है। उन्हें न तो विभिन्न स्थानों के बीच यात्रा करनी पड़ रही है और न ही देशों के बीच सफर करना पड़ रहा है, जैसा कि बाकी टीमों को करना पड़ रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि चूंकि भारत अपने सभी मैच दुबई में खेल रहा है, इसलिए टीम प्रबंधन को खिलाड़ियों के चयन में बड़ा फायदा मिल रहा है। “इसका मतलब है कि टीम संयोजन केवल दुबई की परिस्थितियों के आधार पर किया जा सकता है। साथ ही, अगर टीम सेमीफाइनल में पहुंचती है, तो उन्हें पहले से ही पता होगा कि उन्हें कहां खेलना है। यह एक बड़ा लाभ है, लेकिन इसे मापना थोड़ा मुश्किल है कि यह कितना महत्वपूर्ण हो सकता है,” एथरटन ने जोड़ा।

नासिर हुसैन ने भी दी अपनी प्रतिक्रिया

नासिर हुसैन ने भी इस पर सहमति जताई और कहा कि यह कहना गलत नहीं होगा कि “मेजबान पाकिस्तान है, लेकिन घरेलू परिस्थितियों का लाभ भारत को मिल रहा है।”

उन्होंने बताया कि अन्य टीमों को विभिन्न स्थानों पर खेलने की आदत डालनी होगी, जबकि भारत को केवल दुबई में खेलने का फायदा मिलेगा। इससे भारतीय खिलाड़ी उसी पिच और वातावरण में बार-बार खेलने के कारण अधिक आत्मविश्वास महसूस करेंगे।

क्या सच में भारत को मिल रहा है अतिरिक्त फायदा?

अगर देखा जाए तो भारत का दुबई में खेलने का अनुभव बाकी टीमों की तुलना में कहीं अधिक है। आईपीएल और एशिया कप के दौरान भारतीय खिलाड़ी यहां कई बार खेल चुके हैं। वहीं, बाकी टीमों को पाकिस्तान, अबू धाबी, लाहौर और कराची जैसी जगहों पर भी मैच खेलने पड़ेंगे, जिससे उन्हें माहौल बदलने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

इसके अलावा, भारतीय टीम को बार-बार सफर करने की जरूरत नहीं है, जिससे खिलाड़ियों की थकान कम होगी। लगातार एक ही स्थान पर खेलकर टीम को पिच और परिस्थितियों को समझने का फायदा मिलेगा, जिससे उनके जीतने की संभावना और बढ़ जाएगी।

क्या यह फैसला निष्पक्ष है?

भले ही पाकिस्तान आधिकारिक मेजबान हो, लेकिन टूर्नामेंट का यह फॉर्मेट कई लोगों को हैरान कर रहा है। पाकिस्तान को अपने ही घर में अलग-अलग जगहों पर खेलना पड़ रहा है, जबकि भारत को एक ही जगह खेलने का फायदा मिल रहा है। ऐसे में क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह निर्णय निष्पक्ष है या भारत को जानबूझकर फायदा दिया जा रहा है?

बहरहाल, चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 में भारत का प्रदर्शन यह तय करेगा कि यह ‘अवश्यंभावी लाभ’ वास्तव में कितना प्रभावी साबित होता है।

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