सितंबर में भी नहीं थमेगा मॉनसून का कहर: मौसम विभाग ने दी चेतावनी

इस साल का मॉनसून देश के लिए अब तक एक चुनौती भरा अनुभव रहा है। जून और जुलाई के बाद अगस्त में भी भारी बारिश ने उत्तर से लेकर दक्षिण तक अधिकांश हिस्सों को भिगो दिया है। खासतौर पर 15 अगस्त से 31 अगस्त के बीच तो कई राज्यों में रिकॉर्ड स्तर पर वर्षा दर्ज की गई है। इससे न केवल जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ, बल्कि कई जगहों पर बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने तबाही मचाई।

उत्तर भारत में सबसे ज्यादा असर

उत्तर भारत, विशेषकर हिमालयी राज्य जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर, इस बारिश से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। इन राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते भूस्खलन, सड़कें बंद, पुल बहने और बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं। कई जिलों में राहत और बचाव कार्य चल रहे हैं, लेकिन मौसम की मार के आगे व्यवस्थाएं भी सीमित दिखाई दी हैं।

सितंबर में क्या होगा?

अब सवाल यह उठता है कि क्या सितंबर में भी ऐसा ही मौसम बना रहेगा? क्या देश को अगले महीने राहत मिल पाएगी या फिर बारिश का सिलसिला और आगे खिंच सकता है?

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, सितंबर 2025 में भी अच्छी बारिश के संकेत हैं। विभाग का कहना है कि फिलहाल मॉनसून की वापसी के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। हर साल सामान्य तौर पर 15 सितंबर के बाद मॉनसून की विदाई की प्रक्रिया शुरू होती है और अक्टूबर की शुरुआत तक इसका असर खत्म हो जाता है। लेकिन इस बार मॉनसून कुछ ज्यादा ही सक्रिय है।

मॉनसून की वापसी में हो सकती है देरी

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह साल मॉनसूनी बारिश के लिहाज से एक “सक्रिय वर्ष” है। सितंबर में भी कई हिस्सों में ऊपर-से-सामान्य (Above Normal) बारिश देखने को मिल सकती है। ऐसे में 15 सितंबर के बाद ही मौसम विभाग ये स्पष्ट कर पाएगा कि मॉनसून की वापसी कब शुरू होगी और इसका असर कब तक बना रहेगा।

किसे रहने की जरूरत है सतर्क?

उत्तर भारत, पूर्वोत्तर और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में सितंबर के पहले पखवाड़े तक भारी बारिश के आसार हैं। पहाड़ी राज्यों में पहले से ही ज़मीन ढीली होने की वजह से भूस्खलन का खतरा बना रहेगा। इसके अलावा, जिन क्षेत्रों में नदियां पहले से उफान पर हैं, वहां और बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *