नई दिल्ली: सरकार एक ‘यूनिवर्सल पेंशन योजना’ (सार्वभौमिक पेंशन योजना) पर काम कर रही है, जो देश के सभी नागरिकों के लिए उपलब्ध होगी। श्रम मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के लोगों को एक संगठित और सुविधाजनक पेंशन प्रणाली के तहत लाना है।
असंगठित क्षेत्र के लोगों को मिलेगा लाभ
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भारत में असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगारों के पास वर्तमान में कोई ठोस और प्रभावी सरकारी बचत योजना नहीं है। निर्माण मजदूर, घरेलू कर्मचारी, गिग वर्कर्स (फ्रीलांस वर्क करने वाले लोग), और अन्य अनौपचारिक क्षेत्रों में कार्यरत लोगों को इस नई पेंशन योजना का सीधा लाभ मिलेगा। अभी तक, इनके लिए कोई ठोस सरकारी पेंशन योजना उपलब्ध नहीं थी, जिससे उन्हें बुढ़ापे में वित्तीय असुरक्षा का सामना करना पड़ता था।
सभी वेतनभोगी और स्वरोजगार वाले लोग भी होंगे शामिल
यूनिवर्सल पेंशन योजना के तहत सिर्फ असंगठित क्षेत्र के लोग ही नहीं, बल्कि संगठित क्षेत्र के वेतनभोगी कर्मचारी और स्वरोजगार करने वाले व्यक्ति भी आ सकेंगे। वर्तमान में, संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन – EPFO) जैसी योजनाएँ मौजूद हैं, लेकिन कई बार इनमें शामिल होने की जटिल प्रक्रियाएँ होती हैं। नई पेंशन योजना को सरल और स्वेच्छिक बनाया जाएगा, जिससे कोई भी व्यक्ति इसमें आसानी से जुड़ सके।
सरकार नहीं करेगी वित्तीय योगदान
इस योजना की सबसे खास बात यह होगी कि इसमें योगदान पूरी तरह से स्वेच्छिक होगा। सरकार इसमें कोई वित्तीय सहायता नहीं देगी, बल्कि नागरिकों को अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए खुद बचत करनी होगी। वर्तमान में, कई सरकारी पेंशन योजनाओं में सरकार कुछ योगदान देती है, लेकिन इस योजना में ऐसा नहीं होगा। यह योजना पूरी तरह से स्वयं-निधिक होगी, यानी व्यक्ति जितनी बचत करेगा, उतना ही उसे पेंशन का लाभ मिलेगा।
वर्तमान योजनाओं का विलय संभव
सूत्रों के अनुसार, सरकार कुछ मौजूदा बचत और पेंशन योजनाओं को मिलाकर इस नई पेंशन योजना को एकीकृत कर सकती है। इससे विभिन्न योजनाओं के बीच भ्रम की स्थिति खत्म होगी और एक ही योजना के तहत सभी के लिए सुविधाजनक और स्पष्ट पेंशन व्यवस्था बनाई जा सकेगी।
सरकार का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य पूरे देश में पेंशन और बचत ढांचे को मजबूत करना और उसे अधिक समावेशी बनाना है। आज भी देश के करोड़ों लोग बुढ़ापे के लिए पर्याप्त बचत नहीं कर पाते, जिससे उन्हें अपने जीवन के उत्तरार्ध में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यह योजना उन्हें आर्थिक रूप से सुरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास होगी।
आगे की राह
हालांकि इस योजना को लागू करने में कई तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियाँ भी होंगी। सरकार को यह तय करना होगा कि योजना में कितने प्रकार के योगदान होंगे, क्या यह निवेश आधारित होगी, और इसे अन्य मौजूदा योजनाओं से कैसे जोड़ा जाएगा। फिलहाल, इस पर विचार-विमर्श जारी है, और आने वाले महीनों में इसके बारे में अधिक स्पष्टता आ सकती है।
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सरकार इस योजना को एक नई दिशा में ले जाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध दिख रही है, जिससे सभी नागरिकों को उनके भविष्य के लिए एक स्थायी वित्तीय सुरक्षा दी जा सके।